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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, Verse 13

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 31, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 31 · श्लोक 13

संस्कृत श्लोक

किमसत्संस्थितं ब्रूहि किं तत्सद्वाथ संस्थितम् । सम्यङ्निदर्शनेनैव करिष्ये तव बोधनम् ॥ १३ ॥

हिन्दी अर्थ

भले ही ऐसा हो, पर ऐसी अवस्था में अनात्मवस्तुओं में सत्ता और असत्ता के विभाग का निरूपण ही करना कठिन हो जायेगा, ऐसा कहनेवाले श्रीवसिष्ठजी श्रीरामचन्द्रजी से पूछते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, कौन वस्तु सत्‌ है अथवा कौन असत्‌ है, यह बतलाइये, मैं भलीभाँति दृष्टान्त से ही आपको समझाऊँगा