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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, Verse 9

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 3, verse 9 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 3 · श्लोक 9

संस्कृत श्लोक

नानुभूतेऽनुभूते च स्वतश्चिद्व्योम्नि या स्मृतिः । सा जगद्भूरिति प्रौढा दृश्या सास्त्येव चित्प्रभा ॥ ९ ॥

हिन्दी अर्थ

पूर्वकल्पीय सर्ग स्मृतिरूप ही हैं, वेभी सिद्ध नहीं होंगे, इसलिए अनुभूत या अननुभूत स्वतःसिद्ध चिदाकाश में जिसकी आपने स्मृतिरूपसे आशंका की है, वह प्रौढ़ एवं दृश्य जगतस्थितचित्प्रभा ही है ओर वह सदा स्थित है। यही सत्कार्यवादी श्रुतियोंका आशय है, यह भाव