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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 7

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 7

संस्कृत श्लोक

मायाकृतायुधमहाम्बुघनप्रवाहा क्षिप्रावहा प्रतिदिशं किल निर्जगाम । पाषाणपर्वतमहीरुहलक्षवृक्षक्षुब्धाम्बुपूरघनघोषवती नदी द्राक् ॥ ७ ॥

हिन्दी अर्थ

माया से रचे गये आयुध ही जिसमें बड़ा भारी निबिड जल प्रवाह था, शीघ्र बहनेवाली, पत्थर, पर्वत लाखों साधारण वृक्ष ओर प्रधान वृक्षों से क्षुब्ध हुए जल प्रवाह से घन शब्द करनेवाली नदी तुरन्त चारों दिशाओं में बहने लगी