Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
कंचित्कालं समासाद्य स्वात्मोदयकरं शुभम् ।
चक्रुर्दुन्दुभिनिर्घोषं प्रलयाभ्ररवोपमम् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
अपना अभ्युदय करनेवाले किसी शुभ अवसर को पाकर देवताओं ने प्रलयकाल के मेघ की
ध्वनि के सदुश ध्वनिवाला दुन्दुभिघोष किया