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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 17

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 17 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 17

संस्कृत श्लोक

शरीररूढोन्नतहेतिवृक्षवनावलीलग्नमहाग्निदाहाः । सुरासुराः प्रापुरथाम्बरान्तः कल्पानिलान्दोलितशैलशोभाम् ॥ १७ ॥

हिन्दी अर्थ

जिनके शरीर में गड़े हुए ऊँचे-ऊँचे आयुधरूपी वृक्षों से बनी हुई वनपंक्तियों में महान अग्निदाह हो रहा था, ऐसे असुरो ने आकाश के बीच प्रलयकाल में वायु से झकझोरे गये पर्वत की शोभा प्राप्त की