Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
गरुडगुडगुडाकुलान्तरिक्षप्रविसृतहेतिहुताशपर्वतौघैः ।
जगदभवदसह्यकल्पकाले ज्वलितसुरालयभूतलान्तरालम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
गरुड़ारत्र से उत्पन्न
हुए गरुडो से ओर उनकी गुड गुड़ ध्वनियों से व्याप्त आकाश में फैले हुए आयुधरूप अग्नि के पर्वतों
के प्रवाहो से भी सारा-का-सारा जगत असह्य प्रलयकाल की तरह जिसमें स्वर्ग ओर भूतल का
मध्यभाग जला हो, ऐसा हो गया