Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 28, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 28 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
उन्नादवज्रमकरोत्करकर्कशान्तःक्षुब्धाब्धिवीचिवलयैर्वलिताचलेन्द्रैः ।
आसीज्जगत्सकलमेव सुसंकटाङ्गमावृत्तिभिर्विविधहेतिनदीप्रवाहैः ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
विविध शस्त्रास्त्रं की नदी के प्रवाहों
से, जिन्होंने मेरु पर्वत को वेष्टित कर रख्खा था, खूब शब्द कर रहे, वजर आदि रत्नों से ओर मगरों
के समूह से कठिन तथा भीतर क्षुब्ध हुए समुद्र की लहरों से सारा-का-सारा जगत परिवर्तनां द्वारा
पीडित हुआ