Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 29
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 29
संस्कृत श्लोक
अयं सोऽहं ममेदं चेत्येवमन्तः सवासनम् ।
यथा दामादयः शक्र भावयन्ति तथा कुरु ॥ २९ ॥
हिन्दी अर्थ
हे इन्द्र, जिस उपाय से दाम, व्याल ओर कट अपने अंतःकरण को
यह देह आदि ही प्रसिद्ध मैं हूँ और यह जय-पराजय, पूजा, जीवन आदि मेरा है, इस प्रकार वासनायुक्त
समझें, उस उपाय को आप कीजिये