Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, Verse 25
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 27, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 27 · श्लोक 25
संस्कृत श्लोक
आस्थामात्रमनन्तानां दुःखानामाकरं विदुः ।
अनास्थामात्रमभितः सुखानामाकरं विदुः ॥ २५ ॥
हिन्दी अर्थ
ज्ञानी लोग आसक्ति को अनन्त
दुःखों की खान कहते हैं तथा सर्वतः केवल अनासक्ति को सम्पूर्ण सुखो की खान कहते हे