Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, Verses 22–23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 26, verses 22–23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 26 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
प्रलयप्रत्ययोल्लासिकल्पान्तारावबृंहणः ।
द्वादशादित्यसंघट्टद्रवत्काञ्चनपर्वतः ॥ २२ ॥
ब्रह्माण्डकुण्डसंघट्टात्परावृत्त्या च निर्गतः ।
महास्रोतःपयःपूरः सत्त्वाहत इवाकरः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
वह प्रलयकाल के हेतुभूत अग्नि, वायु आदि से उल्लसित होनेवाले, ब्रह्मा के दिन-भूत
सृष्टिकाल के अन्त में होनेवाले कोलाहल की प्रतिध्वनि के तुल्य था और बारह सूर्यो के सम्मेलन से
पिघल रहे सुवर्णं पर्वत के शब्द के तुल्य था