Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, verse 3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 3
संस्कृत श्लोक
कलेवरालयं प्राप्य विषयामिषगृध्नुकाः ।
अक्षगृध्रा विवल्गन्ति कार्याकार्योग्रपक्षिणः ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
अनिषिद्ध तथा निषिद्ध कर्मरूपी प्रचण्ड पंखों से युक्त, विषयरूपी मांस
के लोभी इन्द्रियरूपी गीध शरीररूपी घोंसले को पाकर बड़ा पराक्रम दिखलाते हैं