Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 20
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, verse 20 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 20
संस्कृत श्लोक
दामव्यालकटन्यायो मा ते भवतु राघव ।
भीमभासदृढस्थित्या त्वं यास्यसि विशोकताम् ॥ २० ॥
हिन्दी अर्थ
तत्त्वदृष्टि से यद्यपि ये असत्य हैं, तथापि मोहद्रष्टि से उनकी सत्यता अनुभव सिद्ध है, इसलिए
उनकी चिकित्सा के बिना वासना की दृढता से दाम, व्याल और कट के न्याय से अनर्थ की प्राप्ति दुर्वार
है। विवेक आदि के अभ्यास से उनकी चिकित्सा हो जाने पर तो भीम, भास और दृढ की स्थिति से
अनर्थ की प्राप्ति नहीं होगी, ऐसा कहते है ।
भीम-भास-दुढ स्थिति से आप विशोकता को प्राप्त हो जायेंगे