Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 24, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 24 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
दिशत्येवं मनोमन्त्री कर्माणि शुभकर्मणि ।
एवं मनोमणिं राम बहुपङ्ककलङ्कितम् ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह रामचन्द्रजी का समाधान करके प्रस्तुत मणिरूपक कह उपसंहार करते है ।
इस तरह हे श्रीरामचन्द्रजी, असंख्यवासनारूपी पंक से मलिन मनोमणि को सिद्धि प्राप्ति के लिए
विवेकजल से धोकर आत्मप्रकाश से युक्त होइये