Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 61
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 61 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 61
संस्कृत श्लोक
हृदयबिले कृतकुण्डल कलनाविवशो मनोमहाभुजगः ।
यस्योपशान्तिमागतमलमुदितं तं सुनिर्मलं वन्दे ॥ ६१ ॥
हिन्दी अर्थ
हृदयरूपी बिल में की गई कुण्डलाकार
कल्पना से गर्वीला हुआ मनरूपी अजगर जिस पुरुष का शान्त हो गया है, अपने स्वरूप से आविर्भूत
अत्यन्त निर्मल उस तत्त्ववेत्ता को मैं प्रणाम करता हूँ