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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 29

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 29 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 29

संस्कृत श्लोक

सुखावहैषा नगरी नित्यं वै विदितात्मनः । भोगमोक्षप्रदा चैषा शक्रस्येवामरावती ॥ २९ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे इन्द्र की अमरावती नगरी सुखदायक ओर भोग-मोक्षप्रद है, वैसे ही तत्त्ववेत्ता की यह देहरूपी महानगरी नित्य सुख देनेवाली ओर भोग-मोक्षप्रद है