Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 22
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 22 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 22
संस्कृत श्लोक
सुखदुःखक्रियाजालं यदेषोद्वहति स्वयम् ।
तदेषा राम सर्वज्ञसर्ववस्तुभरक्षमा ॥ २२ ॥
हिन्दी अर्थ
यह सुख-दुःखमय क्रियाओं
का जाल स्वयं धारण करती है, इसलिए हे श्रीरामचन्द्रजी, यह सर्वज्ञ के भोग और मोक्ष के उपायभूत
सब वस्तुओं का संग्रह करने में समर्थ कही गई है