Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 15
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 15 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 15
संस्कृत श्लोक
गुदोत्थानारघट्टान्तप्रद्रुतानन्तकर्दमा ।
चित्तोद्यानमहीवल्गदात्मचिन्तावराङ्गना ॥ १५ ॥
हिन्दी अर्थ
इसमें
मूत्रस्थानरूपी घटीयन्त्र के प्रान्तप्रदेश में गुदाद्रार से निकलने वाला मलरूपी कीचड़ बह रहा हे । इसमें
चित्तरूपी उद्यानभूमि में सदा खेल रही आत्मविचाररूपी पुरस्वामिनी स्थित हे