Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 23, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 23 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
आस्यस्फारवदादृष्टदन्तास्थिशकलाकुला ।
मुखास्पदाभ्रमज्जिह्वाचण्डीचर्वितभोजना ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
मुख
में हाथी के दाँत के एक भाग की तरह थोड़े देखे गये दाँत रूपी हड्डी के टुकड़ों से यह व्याप्त हे । मुँह में
रहनेवाली चारों ओर घूम रही जिह्ारूपी काली ने इसमें भोज्य, चोष्य, लेह्य आदि चार प्रकार के खाद्यों
का आस्वाद लिया है