Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 8
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 8
संस्कृत श्लोक
सिद्धान्तकाले प्रश्नोक्तिरेषा तव विराजते ।
प्रावृषीव हि केकोक्तिर्युक्ता शरदि हंसगीः ॥ ८ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, जैसे वर्षा ऋतु में मयूर की वाणी सुशोभित होती है, शरत काल में
हंस की वाणी भली लगती है, मयुर की वाणी भली नहीं लगती, वैसे ही सिद्धान्त काल में ही आपका यह
वचन सुशोभित होगा