Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 63
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 63 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 63
संस्कृत श्लोक
मत्वान्तस्त्वमनाद्यन्तं भावयात्मानमात्मना ।
चेतसि प्रतिबिम्बन्ति ये भावास्तव राघव ।
रञ्जयन्त्वन्यसक्तत्वान्मा ते त्वां स्फटिकं यथा ॥ ६३ ॥
हिन्दी अर्थ
हे श्रीरामचन्द्रजी, आपके चित्त में
जिन भावों का प्रतिबिम्ब पड़ता है, वे स्फटिक की भाँति आपको रंजित न करें क्योंकि आप आत्मतत्त्व
में संलग्न हैं