Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 4

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 4

संस्कृत श्लोक

श्रीवसिष्ठ उवाच । साधु राम त्वया प्रोक्तं जाता ते मोक्षभागिनी । मतिरुत्तमनिष्यन्दा नन्दनस्येव मञ्जरी ॥ ४ ॥

हिन्दी अर्थ

इस तरह श्रीरामचन्द्रजी के पूछने पर श्रीवस्रिष्ठजी तत्त्वपदार्थ के परिचय से चमत्कारयुक्त श्रीरामचन्द्रजी की बुद्धि की पहले प्रशंसा करते हैं। श्रीवसिष्ठजी ने कहा : हे श्रीरामचन्द्रजी, वाह आपने बहुत अच्छा प्रश्न किया । नन्दनवन की मंजरी के समान मकरन्दनिस्यन्दरूपी अनुभव चमत्कारवाली आपकी बुद्धि मोक्षभागिनी हो गई है