Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 39
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 39 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 39
संस्कृत श्लोक
दृश्यतन्मयता यैषा स्वभावस्थानुभूयते ।
संसारमदिरा सेयमविद्येत्युच्यते बुधैः ॥ ३९ ॥
हिन्दी अर्थ
यदि कोई शंका करे कि दृश्य ने क्या बिगाडा है, जिसके परिमार्जन के लिए आप कहते है, तो इस
पर कहते हैं।
स्वभाव में स्थित जो यह दृश्यतन्मयता अनुभूत होती है, वही संसार को मत्त करनेवाली अविद्या
कही जाती है