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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, Verse 31

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 21, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 21 · श्लोक 31

संस्कृत श्लोक

निर्निमित्तोत्थसौम्याम्बुबुद्बुदौघैरिवोत्थितैः । स्वनिश्चितैरिति प्रौढा नानाकारा हि रीतयः ॥ ३१ ॥

हिन्दी अर्थ

बिना किसी निमित्त के उठे हुए निर्मल जल के बुद्बुदों के समूहों की तरह उदित हुए अपने निश्चयो से ही ये नाना प्रकार की रीतियाँ प्रौढता को प्राप्त हुई हं । भाव यह कि सब विचित्र विचित्र कल्पनाओं की जड प्रमाण या प्रमेय नहीं है; किन्तु चिरकाल के अभ्यास से दृढ़ हुई मन की कल्पना ही इनकी जड है