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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 8

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 8 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 8

संस्कृत श्लोक

श्रीराम उवाच । जाग्रत्स्वप्नदशाभेदं भगवन्वक्तुमर्हसि । कथं च जाग्रज्जाग्रत्स्यात्स्वप्नो जाग्रद्भमः कथम् ॥ ८ ॥

हिन्दी अर्थ

संवित्‌ कब बाल रहती है और कब प्रौढ़ होती है, यह विशेषता जानने के लिए जाग्रत और स्वप्न दशाओं की विलक्षणता का हेतु श्रीरामचन्द्रजी पूछते हैं। श्रीरामचन्द्रजी ने कहा : हे भगवन्‌, जाग्रत और स्वप्न दशाओं का भेद आप कहिये और यह भी बतलाइये कि प्रत्यक्ष के अवभास में कोई विशेषता न रहने पर भी जाग्रत किस कारण से सत्य व्यवहार का हेतु होता है और स्वप्न जाग्रत के आकार का भ्रम कहा जाता है ?