Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 35

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 35 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 35

संस्कृत श्लोक

इति विदितवता त्वयाधुनान्तः प्रथितमहामतिनेह सत्यताख्या । असति जगति नैव भावनीया मृतिहतिसंहृतिदोषभावनी या ॥ ३५ ॥

हिन्दी अर्थ

अनर्थ है; इसलिए उसी का त्याग करना चाहिए, ऐसा कहते हैं। हे श्रीरामचन्द्रजी, इस प्रकार ज्ञान को प्राप्त हुए अतः प्रथित महाबुद्धिवाले आपको भी इस असत्य जगत में सत्य दृष्टि नहीं करना चाहिए, क्योंकि वह सत्य दृष्टि आध्यात्मिक निमित्तों से मरण के हेतुभूत दोषों की जननी है