Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 32
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 32
संस्कृत श्लोक
सेवते वासनां यां तां सोऽन्तः पश्यति निद्रितः ।
पवनक्षोभितो रन्ध्रैर्बहिरक्षादिभिर्यथा ॥ ३२ ॥
हिन्दी अर्थ
वह जीवचेतन जिस-जिस वासना का सेवन करता है यानी जिस वासना से वासित
अन्तःकरणवाला होता हे, निद्रावस्था में उसी वासना को प्राणवायु से क्षुब्ध होकर नेत्र आदि छिद्रों से
बाहर के पदार्थो की तरह अपने अन्दर देखता है