Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 19, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 19 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
स्वप्नोऽपि जाग्रद्बुद्ध्यंशो जाग्रत्त्वमनुगच्छति ।
स्वप्नता स्वप्नबुद्ध्या तु यथासंवेदनं स्थितम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
स्वप्न भी,
हरिश्चन्द्र के बारह वर्षवाले स्वप्न की भाँति जिसकी स्थिरता जाग्रदूबुद्धि से ग्रहण करने योग्य हो, वह
जाग्रद्रूप हो जाता है।
तो वह स्वप्न कैसे हुआ ? इस पर कहते हैं।
उसमें स्वप्नता तो स्वप्न बुद्धि से है, क्योकि स्वप्नरूप से ही उसका ज्ञान स्थिर था