Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 68
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 68 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 68
संस्कृत श्लोक
यथा स्पर्शेन पवनः सत्तामायाति नो गिरा ।
तथेच्छातानवेनैव विवेकोऽस्य विबुध्यते ॥ ६८ ॥
हिन्दी अर्थ
तब विवेक के मन में स्थित होने की क्या पहचान है ? इस शंका पर वैराग्य ही एकमात्र उसकी
पहचान है, ऐसा कहते हैं।
जैसे स्पर्श से वायु सत्ता को प्राप्त होता है वाणी से नहीं, वैसे ही एकमात्र इच्छा के दूर होने से यानी
वैराग्य से ही विवेक जाना जाता है। जैसे प्रत्यक्ष स्पर्श वायु का लक्षण है, वचनमात्र स्पर्श उसका लक्षण
नहीं है, यह भाव हे