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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, Verse 60

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 18, verse 60 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 18 · श्लोक 60

संस्कृत श्लोक

सर्वात्मत्वात्स्वभावस्य तद्दृश्यं सत्यमात्मनि । सर्वगं विद्यते यत्र तत्र सर्वमुदेति हि ॥ ६० ॥

हिन्दी अर्थ

उन लोगों की दृष्टि में भीतर ही विश्व का उदय होने पर भीतर ही विश्व की सत्ता का हेतु है। किन्हीं की दृष्टि में बाहर उसका दर्शन होने पर बाहर ही उसकी सत्ता का हेतु है, ऐसी बीज की व्यवस्था मन में रखकर कहते हैं। चित्स्वभाव सर्वरूप है, इसलिए वह दृश्य आत्मा में आत्माभिमान रूप से सत्य ही है। जहाँ सर्वव्यापी आत्मा है, वहाँ पर सब कुछ उदित होता है