Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 4
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, verse 4 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 4
संस्कृत श्लोक
महाकल्पान्त आयाते भवता भार्गवी तनुः ।
अपुनर्ग्रहणायैषा त्याज्या प्रम्लानपुष्पवत् ॥ ४ ॥
हिन्दी अर्थ
महाकल्परूप ब्रह्मा के दिन का (हजार
चौकडी का) अन्त होनेपर आप भृगुजी से उत्पन्न देह का, पुनः अन्य शरीर का ग्रहण न करने के लिए,
उपभुक्त अतएव मुरझाये हुए फूल की नाई त्याग कीजिये