Guru's AddaGuru's Adda

Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 25

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, verse 25 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 25

संस्कृत श्लोक

अथासुरगुरुत्वं स शुक्रः कालेन लब्धवान् । भृगुरप्यात्मनो योग्ये पदेऽतिष्ठदनामये ॥ २५ ॥

हिन्दी अर्थ

तदनन्तर समय आने पर शुक्राचार्यजी ने दैत्यों का आचार्यत्व तथा ग्रहपति का अधिकार प्राप्त किया। भृगुजी भी अपने योग्य निरामय आत्मतत्त्व में स्थित हो गये