Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, Verse 10
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 16, verse 10 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 16 · श्लोक 10
संस्कृत श्लोक
सा ब्राह्मणीतनुर्भूमौ विवर्णवदनाङ्गिका ।
पपात कम्पिता तूर्णं छिन्नमूला लता यथा ॥ १० ॥
हिन्दी अर्थ
वासुदेव नामवाली समंगातटवर्ती तपस्वी ब्राह्मण की
देह , जिसका मुख तथा सम्पूर्ण अंग विकृत वर्णवाले हो गये थे, जिसकी जड़ कट गई हो ऐसी लता की
भाँति कोप कर शीघ्र ही गिर पड़ी