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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verse 32

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, verse 32 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 32

संस्कृत श्लोक

विहितब्राह्मसंस्कारा तत्र सा पितुरग्रगा । कालेन महता प्राप्ता शुष्ककङ्कालरूपताम् ॥ ३२ ॥

हिन्दी अर्थ

उस जन्म में उसके ब्राह्मण जन्मोचित गभाधान आदि सब संस्कार विधिपूर्वक किये गये थे, वहौँ पर समाधिस्थ पिता के आगे विद्यमान वह शुक्राचार्य की देह एक लम्बे अरसे से सूखे हुए कंकाल के रूप में परिणत हो गई