Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, Verses 2–3
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 15, verses 2–3 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 15 · श्लोक 2-3
संस्कृत श्लोक
क्रमादाकाशमाक्रम्य निर्गत्याम्बुदकोटरैः ।
संप्रापुः सिद्धमार्गेण क्षणान्मन्दरकन्दरम् ॥ २ ॥
अधित्यकायां तस्याद्रेरार्द्रपर्णावगुण्ठिताम् ।
ददर्श भार्गवः शुष्कां पूर्वजन्मोद्भवां तनुम् ॥ ३ ॥
हिन्दी अर्थ
क्रमशः आकाश को आक्रान्त कर मेघच्छिद्रों से बाहर निकलकर वे सिद्धमार्ग से क्षणभर में
मन्दराचल की गुफा में पहुँच गये । उस पर्वत की ऊँची भूमि में शुक्र ने अपने पूर्व जन्म के सूखे शरीर
को देखा जो कि हरे पत्थरों से ठका था