Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 43
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 43 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 43
संस्कृत श्लोक
ज्ञातं ज्ञातव्यमधुना दृष्टं द्रष्टव्यमक्षतम् ।
विश्रान्तोऽथचिरं श्रान्तो गतो मे सकलो भ्रमः ॥ ४३ ॥
हिन्दी अर्थ
एक आत्मा के साक्षात्कार से भी सबका ज्ञान दशति है।
इस समय जानने योग्य सारी बातें मैंने जान ली हैं, देखने योग्य सम्पूर्ण वस्तुएँ अच्छी तरह देख ली
हैं, बहुत दिनों से थका हुआ मैं अब विश्राम ले रहा हूँ और मेरे सम्पूर्ण भ्रम दूर हो गये हैं