Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 27
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 27 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 27
संस्कृत श्लोक
कदम्बलतिकापीठादथोत्थाय ननाम तौ ।
समौ समागतौ कान्तौ विप्रौ हीरहराविव ॥ २७ ॥
हिन्दी अर्थ
कदम्ब लता के आसन से उठकर उसने एक साथ आये हुए, विप्रवेषधारी विष्णु शिव के तुल्य समान
कान्तिवाले उन दोनों को प्रणाम किया