Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 23
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 23
संस्कृत श्लोक
हेयोपादेयसंकल्पविकल्पाभ्यां समुज्झितम् ।
संप्रबुद्धमतिं धीरं ददर्श तनयं भृगुः ॥ २३ ॥
हिन्दी अर्थ
“यह अग्राह्य है” तथा "यह ग्राह्य है" इस संकल्प-विकल्प से शून्य तथा आत्मबोध को प्राप्त
हुए अपने धीर पुत्र को भृगुजी ने देखा