Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, Verse 13
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 14, verse 13 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 14 · श्लोक 13
संस्कृत श्लोक
शैलराजश्रियं स्फीतां पश्यन्तौ तावितस्ततः ।
प्राप्तवन्तौ वसुमतीं पुरपत्तनमण्डिताम् ॥ १३ ॥
हिन्दी अर्थ
इस तरह वे दोनों इधर-उधर बढी-चदढी पर्वत की शोभा
को देखते हुए गाँव तथा शहरों से सुशोभित पृथ्वीतल को प्राप्त हुए