Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, Verse 16
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, verse 16 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 16
संस्कृत श्लोक
बहुसुखदुःखकराकराक्षयेयं परमपदास्मरणात्समागतेह ।
परमपदावगमात्प्रयाति नाशं विहगपतिस्मरणाद्विषव्यथेव ॥ १६ ॥
हिन्दी अर्थ
बहुत प्रकार के सुख-दुःख देनेवाले जन्मों की आकाररूप, ज्ञान के बिना कभी क्षीण न होनेवाली
यह जीवता परमपद का स्मरण न करने से संसारिता को प्राप्त हुई है। जैसे भगवान विष्णु के स्मरण से
गजेन्द्र की पीड़ा नष्ट हुई थी वैसे ही परमपद के ज्ञान से वह नाशको प्राप्त होती है