Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, Verse 1
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 12, verse 1 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 12 · श्लोक 1
संस्कृत श्लोक
काल उवाच ।
सुरासुरनराकारा इमा याः संविदो मुने ।
ब्रह्मार्णवादभिन्नास्ताः सत्यमेतन्मृषेतरत् ॥ १ ॥
हिन्दी अर्थ
पहले सब जीवों की ब्रह्मैकता और भेदक प्रपंच की असत्यता का उपपादन करने के लिए कहते हैं ।
काल ने कहा : हे मुनिजी, देव, असुर और नर के आकारवाले ये जीव ब्रह्मरूपी सागर से अभिन्न
हैं, यही बात सत्य है, इससे अतिरिक्त मिथ्या है
सर्ग सन्दर्भ
ग्यारहवाँ सर्ग समाप्त बारहवाँ सर्ग समुद्र और तरंग के दृष्टान्त से प्राप्त हुई आत्माविकारिता के वारणपूर्वक मोह से उत्पन्न हुई विचित्रता की विवर्तरूपता का वर्णन ।