Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 54
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, verse 54 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 54
संस्कृत श्लोक
विचित्ररूपोदेतीयमविचित्रात्स्थितिः शिवात् ।
एकवर्णात्पयोवाहाच्छक्रचापलता यथा ॥ ५४ ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे एक रंग के मेघ से रंग-बिरंग के इन्द्रधनुष की उत्पत्ति होती है वैसे ही विचित्रतारहित,
कल्याणमय परमात्मा से विचित्ररूपवाली यह जगत्स्थिति उत्पन्न होती है