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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 51

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, verse 51 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 51

संस्कृत श्लोक

व्यतिरिक्ता न पयसो विचित्रा वीचयो यथा । व्यतिरिक्ता न विश्वेशात्समग्राः कल्पनास्तथा ॥ ५१ ॥

हिन्दी अर्थ

जैसे विविध आकार-प्रकार की लहरें जल से भिन्न नहीं है, वैसे ये समस्त कल्पनाएँ परमात्मा से भिन्न नहीं है