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Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, verse 23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 23

संस्कृत श्लोक

मनो मनननिर्माणमात्रमेतज्जगत्त्रयम् । न सन्नासदिव स्फारमुदितं नेतरन्मुने ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

तब यूक्ष्म दृष्टि कौन है ? इस शंका पर कहते हैं। हे मुनिजी, एकमात्र मनन से बने हुए ही ये तीनों जगत हैं, क्योकि ये मन के सदृश ही न सत्‌ हैं और न असत्‌ हैं यानी मन के सदृश ही सत्त्व और असत्त्व से अनिर्वचनीय रूप से बड़े आटोप के साथ उदित हैं, ये मन से अतिरिक्त नहीं हैं