Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, Verse 19
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 11, verse 19 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 11 · श्लोक 19
संस्कृत श्लोक
काल उवाच ।
सम्यगुक्तं त्वया ब्रह्मन् शरीरं मन एव च ।
करोति देहं संकल्पात्कुम्भकारो घटं यथा ॥ १९ ॥
हिन्दी अर्थ
इस
तरह विनयपूर्ण वार्तालाप से एवं अपने द्वारा उपदिष्ट सूक्ष्मतत्त्व के ग्रहण से काल सन्तुष्ट हुए थे,
अतएव उनकी उक्ति की प्रशंसा करते हुए काल ने कहा : ब्रह्मन्, आपने मन ही शरीर है, ऐसा जो कहा
है, वह बहुत ठीक कहा है, क्योकि जैसे कुम्हार घड़े को बनाता है, वैसे मन संकल्प से देह का निर्माण
करता है