Yoga Vasistha — Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, Verse 31
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Sthiti Prakarana (Existence), Sarga 1, verse 31 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
स्थिति प्रकरण · सर्ग 1 · श्लोक 31
संस्कृत श्लोक
प्रतिपक्षे कथं किंचिदास्ते च्छायातपे यथा ।
कथमास्ते तमो भानौ कथमास्ते हिमोऽनले ॥ ३१ ॥
हिन्दी अर्थ
चिदेकरससत्ता जड़ अनेकरससत्ता की विरोधिनी है, इसलिए भी चिदेकरससत्ता में जगतसत्ता की
सम्भावना नहीं की जा सकती, ऐसा कहते हैं।
जैसे धूप में छाया नहीं रह सकती, जैसे सूर्य मेँ अन्धकार नहीं रह सकता और जैसे अग्नि में हिम
नहीं रह सकता वैसे ही अपनी विराधी चिदेकरससत्ता में जगत की सत्ता कैसे रह सकती है ? यानी नहीं
रह सकती है