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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verses 5–6

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, verses 5–6 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 5,6

संस्कृत श्लोक

तत्र ये ते महाकाराः पुरुषाः प्रभ्रमन्ति हि । मनांसि तानि विद्धि त्वं दुःखे निपतितान्यलम् ॥ ५ ॥ द्रष्टा योऽयमहं तेषां सविवेको महामते । विवेकेन मया तानि दृष्टान्यन्येव नानघ ॥ ६ ॥

हिन्दी अर्थ

उसमें जो ये विशाल कलेवरवाले पुरूष घूमते है, उन्हें आप बड़े भारी क्लेश में डूबे हुए मन जानिये। जो यह मैं” उनका द्रष्टा हूँ, वह विचार (तत्‌-त्वम्‌-पदार्थशोधनरूप विचाररूप) है, हे पुण्यमय, उक्त विचाररूप मैंने उनको देखा है और किसीने उन्हें नहीं देखा है