Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verse 40
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, verse 40 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 40
संस्कृत श्लोक
यथानर्थमवाप्नोति तथा क्रीडति चञ्चलम् ।
भाविदुःखमपश्यन्स्वं दुर्लीलाभिरिवार्भकः ॥ ४० ॥
हिन्दी अर्थ
जैसे बालक अपने
ऊपर पडनेवाले अनर्थ (दण्ड) की कोई परवाह न कर नानाविध दुर्लीलाओं से खेलता है
ओर अनर्थको प्राप्त होता है वैसे ही चंचल मन भी अपने भावी दुःखकी ओर कुछ भी ध्यान
न देकर जैसे-जैसे अनर्थको प्राप्त होता है वेसे-वेसे दुष्ट लीलाओं द्वारा खेल करता हे