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Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, Verses 22–23

This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 99, verses 22–23 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.

उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 99 · श्लोक 22,23

संस्कृत श्लोक

रुदितं यन्महाक्रन्दं पुंसा बह्नाशु राघव । तद्भोगजालं त्यजता मनसा रोदनं कृतम् ॥ २२ ॥ अर्धप्राप्तविवेकस्य न प्राप्तस्यामलं पदम् । चेतसस्त्यजतो भोगान्परितापो भृशं भवेत् ॥ २३ ॥

हिन्दी अर्थ

हे रामचन्द्रजी, जो मैंने कहा कि पुरुषने बड़े तार स्वर से बहुत रोदन किया, वह भोगसमूह का त्याग कर रहे मनने रोदन किया । जिसे आधा विवेक प्राप्त हो गया है, परमपद प्राप्त नहीं हुआ है, ऐसे चित्त को भोगों का त्याग करने में अत्यन्त परिताप होता है