Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, Verse 7
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 97, verse 7 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 97 · श्लोक 7
संस्कृत श्लोक
तेनेदं सर्वमाभोगि जगदित्याकुलं ततम् ।
मन्ये तद्व्यतिरेकेण परमात्मैव शिष्यते ॥ ७ ॥
हिन्दी अर्थ
इस प्रकार कर्ता और कर्म के स्वरूप के ज्ञात होने पर उनके शोधनद्वारा उनके अधिष्ठान-
भूत आत्मा को दिखलाने के लिए कहते हैं।
मेरा मत है कि मनने ही विविध रचनाओं से व्याप्त इस विशाल सम्पूर्ण जगत् का विस्तार
किया है। मनसे भिन्न केवल परमात्मा ही अवशिष्ट रहता है, यानी परमात्मा से भिन्न सब कुछ
मन के अन्तर्गत है