Yoga Vasistha — Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, Verse 46
This page presents the Yoga Vasistha (Yogvashistha), Utpatti Prakarana (Creation), Sarga 96, verse 46 — the original Sanskrit shloka(s) with their Hindi meaning.
उत्पत्ति प्रकरण · सर्ग 96 · श्लोक 46
संस्कृत श्लोक
स्वभावाभिमतां बुद्धिमारोप्य मनसा कृताः ।
मनोबुद्धीन्द्रियादीनां विचित्रा नामरीतयः ॥ ४६ ॥
हिन्दी अर्थ
अपने-अपने तर्को के अभिमत
द्रव्यत्व, गुणत्व आदि बुद्धि का मनमें आरोप कर अपनी इच्छा से उन्होंने मन, बुद्धि, इन्द्रिय
आदि के विचित्र नामभेद किये हैं